
गौरी पंचांगम में रोगम: इसका क्या अर्थ है?
गौरी पंचांगम में रोगम को समझें और दैनिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव जानें। बेहतर परिणामों के लिए अशुभ समय की पहचान कैसे करें और उनसे कैसे बचें, यह जानें।


पोष वद सप्तमी - विक्रम संवत २०८२
अमृत (श्रेष्ठ): ०३:३१ PM - ०४:५३ PM
काल (नुकसान): ०४:५३ PM - ०६:१४ PM


शुभ-अशुभ समय जानने के लिए गौरी पंचांग देखें। यह दक्षिण भारत में दैनिक कार्यों और पूजा की योजना के लिए उपयोग होता है।
