शुभ पंचांग लोगो

सर्वार्थ सिद्धि योग – सफलता देने वाला शुभ योग

सर्वार्थ सिद्धि योग वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शुभ योगों में से एक माना जाता है। यह तब बनता है जब कोई विशेष नक्षत्र किसी विशेष वार के साथ आता है। पंचांग के अनुसार यह योग ऐसा समय माना जाता है जब शुरू किए गए कार्य सफलता और सकारात्मक परिणाम देने वाले माने जाते हैं।

"सर्वार्थ" का अर्थ है सभी उद्देश्य और "सिद्धि" का अर्थ है सफलता। इसलिए सर्वार्थ सिद्धि योग ऐसा समय माना जाता है जब किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है।

खगोलीय आधार

सर्वार्थ सिद्धि योग वार और नक्षत्र के विशेष संयोजन से बनता है। इसकी गणना पंचांग में चंद्रमा के नक्षत्र गोचर के आधार पर की जाती है। जब चंद्रमा किसी विशेष नक्षत्र में होता है और वह किसी निश्चित वार के साथ मेल खाता है, तब यह योग बनता है।

ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष में सर्वार्थ सिद्धि योग को नया कार्य शुरू करने, व्यापार आरंभ करने, शिक्षा प्रारंभ करने, यात्रा करने, समझौते करने और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ समय माना जाता है।

इस योग में किए जाने वाले शुभ कार्य

इस अवधि में लोग नया व्यवसाय शुरू करते हैं, निवेश करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और महत्वपूर्ण योजनाओं या परियोजनाओं की शुरुआत करते हैं।

वार और नक्षत्र के संयोजन

सर्वार्थ सिद्धि योग तब बनता है जब कुछ विशेष नक्षत्र विशेष वार के साथ आते हैं। इन संयोजनों का उल्लेख पारंपरिक पंचांग और मुहूर्त ग्रंथों में मिलता है। जब निर्धारित वार और नक्षत्र का यह मेल बनता है, तब सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण माना जाता है।

  • रविवार - हस्त, मूल, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढा, उत्तरभाद्रपदा, पुष्य, आश्लेषा नक्षत्र
  • सोमवार - श्रवण, रोहिणी, मृगशीर्ष, पुष्य, अनुराधा नक्षत्र
  • मंगलवार - अश्विनी, उत्तरभाद्रपदा, कृत्तिका, आश्लेषा नक्षत्र
  • बुधवार - रोहिणी, अनुराधा, हस्त, कृत्तिका, मृगशीर्ष नक्षत्र
  • गुरुवार - रेवती, अनुराधा, अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य नक्षत्र
  • शुक्रवार - रेवती, अनुराधा, अश्विनी, पुनर्वसु, श्रवण नक्षत्र
  • शनिवार - श्रवण, रोहिणी, स्वाति नक्षत्र

जब भी पंचांग में ये संयोजन बनते हैं, उस समय को महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने, व्यापार आरंभ करने, शिक्षा से जुड़े कार्य, निवेश और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग क्या है?

सर्वार्थ सिद्धि योग वैदिक ज्योतिष में वार और नक्षत्र के विशेष संयोग से बनने वाला अत्यंत शुभ योग माना जाता है। जब कोई विशेष नक्षत्र किसी निश्चित वार के साथ आता है, तब यह योग बनता है। पंचांग में इसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।

यह योग कितनी बार बनता है?

सर्वार्थ सिद्धि योग चंद्रमा के नक्षत्र गोचर पर आधारित होता है, इसलिए यह वर्ष में कई बार बन सकता है। इसकी सटीक तिथि और समय पंचांग में देखे जा सकते हैं।

यह योग महत्वपूर्ण क्यों है?

ज्योतिष मान्यता के अनुसार इस योग में शुरू किए गए कार्य सफलता और सकारात्मक परिणाम देने वाले माने जाते हैं। इसी कारण लोग नए कार्य, निवेश या महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए इस योग को शुभ मानते हैं।